दिलशाद अंसारी की मौत का मामला मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचा, विधायक अभिषेक रंजन के पत्र पर गृह विभाग को कार्रवाई का निर्देश
पुलिस हिरासत में मौत की उच्चस्तरीय जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर विधायक ने उठाई आवाज
बेतिया। चनपटिया प्रखंड के अवरैया गांव निवासी दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में हुई मौत का मामला अब मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंच गया है। चनपटिया के विधायक अभिषेक रंजन द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर न्याय की मांग किए जाने के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए गृह विभाग के प्रधान सचिव के पास भेजा है। सचिवालय ने मामले में नियमानुसार जांच कर समुचित निर्णय लेने तथा की गई कार्रवाई से विधायक को अवगत कराने का निर्देश दिया है।
विधायक अभिषेक रंजन ने 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर दिलशाद अंसारी की मौत की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हत्या की प्राथमिकी दर्ज करने, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करने की मांग की थी।
मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव मो. इमरान की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में विधायक के आवेदन का उल्लेख करते हुए उसे गृह विभाग के प्रधान सचिव को भेजने की जानकारी दी गई है। पत्र में संबंधित मामले की जांच कर समुचित निर्णय लेने और की गई कार्रवाई से विधायक के साथ मुख्यमंत्री सचिवालय को भी अवगत कराने को कहा गया है।
दिलशाद के परिवार को न्याय दिलाना मेरी जिम्मेदारी : अभिषेक रंजन
विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि दिलशाद अंसारी की मौत का मामला बेहद गंभीर है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। किसी भी परिस्थिति में पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
विधायक ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से उठा रहे हैं और परिवार को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेंगे।
मुख्यमंत्री सचिवालय से पत्र गृह विभाग को भेजे जाने के बाद अब मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग के बीच यह मामला प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ा है।

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