माकपा के जांच दल ने परिजनों से की मुलाकात, 30 लाख रुपये मुआवजा और पत्नी को सरकारी नौकरी देने की उठाई मांग
बेतिया | चनपटिया प्रखंड के औरैया बरई टोला निवासी दिलशाद अंसारी की मौत के मामले में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पश्चिम चंपारण जिला कमिटी के जांच दल ने उनके घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। जांच दल ने मृतक के पिता अकबर अंसारी का बयान सुना और परिवार से घटना की जानकारी ली। इस दौरान पार्टी नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
परिजनों के अनुसार, बीते दिनों बानूछापर और सहोदरा थाना क्षेत्र से जुड़े करीब 20 पुलिसकर्मी देर रात दिलशाद अंसारी को उनके घर से ले गए थे। अगले दिन सुबह बेतिया स्थित जीएमसीएच में उनका शव मिलने की बात सामने आई। परिजनों ने उनके माथे पर गहरे निशान और खून निकलने की बात भी कही है। इस घटना को लेकर परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों और कथित पुलिस ज्यादती की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच दल जब मृतक की पत्नी और अन्य परिजनों से मिलने पहुंचा, उस समय चंपारण रेंज के डीआईजी, एएसपी, नरकटियागंज के डीएसपी सहित कई थानों की पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। जांच दल के सदस्यों ने डीआईजी से मिलकर अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई। पार्टी नेताओं के अनुसार, डीआईजी ने मृतक के पिता से औपचारिक बयान लिए जाने की बात कही।
माकपा के जांच दल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेकर उसके साथ हिंसा करने या उसकी जान लेने का अधिकार कानून किसी को नहीं देता। यदि जांच में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता और उनकी आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। जांच दल ने यह भी कहा कि मामले में केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।
पार्टी नेताओं ने बताया कि पश्चिम चंपारण के पुलिस अधीक्षक की ओर से इस मामले में कथित रूप से संलिप्त छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी मिली है। जांच दल ने मांग की कि घटना में दोषी पाए जाने वाले सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही मृतक के आश्रित परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा देने, उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी सरकार द्वारा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
जांच दल ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच, जवाबदेही तय करने और परिवार को उचित सहायता देने की आवश्यकता है।
जांच दल का नेतृत्व माकपा के बिहार राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रभुराज नारायण राव ने किया। इसमें जिला सचिव चांदसी प्रसाद यादव, जिला सचिव मंडल सदस्य एडवोकेट प्रकाश कुमार वर्मा, प्रभुनाथ गुप्ता, मोहम्मद वहीद, नीरज बरनवाल, मोहम्मद हनीफ, जयनाथ प्रसाद, मोहम्मद सहीम, संजय राव, मोहम्मद फारूख, मनौव्वर अंसारी, दोवा हकीम सहित अन्य लोग शामिल रहे।

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