बेतिया: रात 2 बजे पुलिस घर से ले गई दिलसाद अंसारी, सुबह अस्पताल में मिली लाश; परिवार ने उठाए सवाल

पश्चिम चंपारण के बेतिया में दिलसाद अंसारी की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों के मुताबिक, पुलिस उसे रात करीब 2 बजे घर से अपने साथ ले गई थी और सुबह अस्पताल में उसका शव मिला। परिवार ने उसके सिर पर गंभीर चोट होने का दावा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, पुलिस के अनुसार, दिलसाद एनडीपीएस कांड संख्या 65/25 में पूछताछ के लिए ले जाते समय गाड़ी से कूद गया था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मुख्य बातें:

  1. रात 2 बजे कार्रवाई: परिजनों के अनुसार, पुलिस दिलसाद को घर से अपने साथ ले गई।
  2. सुबह अस्पताल में मौत: करीब 5 बजे परिवार को उसकी तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली।
  3. सिर पर गंभीर चोट: परिजनों ने उसके माथे पर गंभीर चोट होने का दावा किया।
  4. पुलिस का बयान: पुलिस के मुताबिक, दिलसाद गाड़ी से कूद गया था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
  5. निष्पक्ष जांच की मांग: परिवार ने घटना की जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
फाइल फोटो 

बेतिया |12 Oct| पश्चिम चंपारण के बेतिया से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली और हिरासत में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रात करीब दो बजे पुलिस दिलसाद अंसारी के घर पहुंची, दरवाजा खुलवाया और उसे अपने साथ गाड़ी में लेकर चली गई। लेकिन कुछ ही घंटों बाद परिवार को फोन आया कि दिलसाद की तबीयत खराब है। जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस दिलसाद को परिवार ने रात में जीवित पुलिस के साथ जाते देखा था, सुबह उसका शव अस्पताल में पड़ा था। परिजनों के मुताबिक, उसके सिर पर गंभीर चोट थी और माथा फटा हुआ था। आखिर कुछ ही घंटों में ऐसा क्या हुआ कि पुलिस के साथ ले जाए गए दिलसाद की मौत हो गई? यही सवाल अब पूरे मामले को कटघरे में खड़ा कर रहा है।

मृतक की पहचान दिलसाद अंसारी, पिता अकबर अंसारी, निवासी औरैया, थाना बानूछापर, जिला पश्चिम चंपारण के रूप में हुई है। मृतक की पत्नी नगमा खातून और पिता अकबर अंसारी ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

परिजनों के मुताबिक, रात करीब दो बजे बानूछापर और सहोदरा थाने की पुलिस उनके घर पहुंची। दरवाजा खटखटाया गया और दिलसाद के बारे में पूछा गया। परिवार ने बताया कि वह घर में सो रहा है। इसके बाद उसे बाहर बुलाया गया और पुलिस अपने साथ गाड़ी में लेकर चली गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस रात के अंधेरे में बिना वारंट के घर पहुंची थी। परिवार का सवाल है कि अगर दिलसाद को किसी मामले में पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा था, तो उन्हें पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई? आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति थी कि पुलिस को रात के दो बजे उसे घर से ले जाना पड़ा?

परिजनों के अनुसार, सुबह करीब पांच बजे फोन आया कि दिलसाद की तबीयत खराब है और उन्हें अस्पताल पहुंचने को कहा गया। परिवार जब अस्पताल पहुंचा, तो दिलसाद मृत अवस्था में पड़ा था। उसके सिर पर गंभीर चोट देखकर परिजन बदहवास हो गए। घर से जीवित ले जाए गए युवक की कुछ ही घंटों बाद मौत की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया। अब परिवार जानना चाहता है कि आखिर दिलसाद के साथ क्या हुआ और उसके सिर पर गंभीर चोट किन परिस्थितियों में लगी?

मृतक की पत्नी नगमा खातून और पिता अकबर अंसारी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब दिलसाद पुलिस के साथ गया था, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? अगर रास्ते में कोई घटना हुई, तो उसकी जानकारी परिवार को समय पर क्यों नहीं दी गई? परिवार की मांग है कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो।

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि दिलसाद की शादी 25 मार्च 2025 को हुई थी और उसकी महज चार महीने की एक बेटी है। जिस मासूम ने अभी अपने पिता को ठीक से पहचानना भी नहीं सीखा, उसके सिर से पिता का साया उठ गया। पत्नी के सामने जिंदगी का सबसे बड़ा संकट खड़ा है, जबकि पिता अकबर अंसारी अपने बेटे की मौत का जवाब मांग रहे हैं।

अब इस मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर दिलसाद को पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा था, तो गाड़ी में उसके साथ क्या हुआ? उसके सिर पर गंभीर चोट कैसे लगी? पुलिस को उसकी तबीयत खराब होने की जानकारी कब मिली? परिवार को अस्पताल बुलाने से पहले उसकी स्थिति क्या थी? क्या गाड़ी से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच होगी? क्या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर परिवार को सच बताया जाएगा?

वहीं, इस मामले में सदर वन डीएसपी अजीत कुमार को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आने और घटना से जुड़े तथ्यों की स्पष्टता बेहद जरूरी है। पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के बीच संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने रखें और जांच को पारदर्शी बनाएं।

इस मामले में सहोदरा थाना अध्यक्ष की जगह सदर वन डीएसपी अजीत कुमार का पक्ष शामिल किया जाना चाहिए। पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिलसाद अंसारी को एनडीपीएस कांड संख्या 65/25 में पूछताछ के लिए लाया जा रहा था। पुलिस के बयान के मुताबिक, इसी दौरान वह गाड़ी से छलांग लगा बैठा, जिससे उसका माथा फट गया। इसके बाद उसे इलाज के लिए जीएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस बयान की पुष्टि और डीएसपी अजीत कुमार का सटीक आधिकारिक पक्ष मिलने पर उसे स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

लेकिन सवाल अब भी कायम है—अगर पुलिस के मुताबिक दिलसाद गाड़ी से कूदा था, तो इस घटना के समर्थन में क्या साक्ष्य मौजूद हैं? क्या गाड़ी में मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों का मिलान किया गया है? परिजनों के आरोपों और पुलिस के बयान के बीच वास्तविक सच्चाई क्या है, यह निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

दिलसाद अंसारी की मौत केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पुलिस हिरासत में सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला है। कानून लागू कराने वाली व्यवस्था से यह अपेक्षा की जाती है कि हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो और किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत की निष्पक्ष जांच कराई जाए। परिजनों ने न्याय की मांग की है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है, जिम्मेदारी किसकी तय होती है और क्या इस परिवार को अपने सवालों के जवाब मिल पाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल—रात में पुलिस के साथ गया दिलसाद सुबह मृत कैसे मिला? परिवार को जवाब चाहिए, मामले की निष्पक्ष जांच चाहिए और अगर किसी की लापरवाही या गलती सामने आती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

Update 13 Oct

इस मामले में माले नेता फरहान राजा, राजद के एक कार्यकर्ता ने मुआवजा एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी, आज पुलिस अधीक्षक बेतिया द्वारा तत्काल कार्रवाई कर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सहोदर थाना के थाना अध्यक्ष समेत 6 लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की बात बताई गई है.

टिप्पणियाँ