आदर्श जाँच घर के संस्थापक सैयद दिलदार हुसैन का हुआ निधन

प्रसिद्ध पैथोलॉजिस्ट एवं आदर्श जांच घर के संस्थापक सैयद दिलदार हुसैन का निधन, बेतिया और चंपारण शोकाकुल

बेतिया टाइम्स | एम. शकील

पश्चिम चंपारण के प्रसिद्ध पैथोलॉजिस्ट, आदर्श जांच घर (आदर्श लैब) के संस्थापक तथा समाजसेवी एवं धार्मिक व्यक्तित्व सैयद दिलदार हुसैन का गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को हैदराबाद में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही बेतिया समेत पूरे चंपारण में शोक की लहर दौड़ गई। चिकित्सा, सामाजिक और धार्मिक जगत के लोगों ने इसे क्षेत्र की अपूरणीय क्षति बताया।

चिकित्सा सेवा को समर्पित रहा जीवन

सैयद दिलदार हुसैन का जन्म 9 नवंबर 1946 को बिहार के नालंदा जिले के बोनिया गांव में हुआ था। पटना से लैब टेक्नोलॉजी की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने वर्ष 1967 में बेतिया के महारानी जानकी कुँवर (एमजेके) अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में अपनी सेवाएं शुरू कीं। अपनी ईमानदारी, दक्षता और सरल स्वभाव के कारण वह जल्द ही जिले के सबसे विश्वसनीय पैथोलॉजी विशेषज्ञों में गिने जाने लगे।

वर्ष 1988 में उन्होंने आदर्श जांच घर (आदर्श लैब) की स्थापना की। यह संस्थान आज पश्चिम चंपारण के सबसे भरोसेमंद जांच केंद्रों में शामिल है। वर्ष 2004 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ मरीजों की सेवा जारी रखी। उनकी पहल से हजारों लोगों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण पैथोलॉजी जांच की सुविधा अपने ही जिले में उपलब्ध हो सकी।

दो महीने से चल रहा था इलाज

पिछले लगभग दो महीनों से वह अस्वस्थ थे। पहले उनका इलाज लखनऊ में चला, बाद में उन्हें हैदराबाद ले जाया गया, जहां गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

चिकित्सा के साथ धार्मिक और सामाजिक जीवन में भी निभाई अहम भूमिका

सैयद दिलदार हुसैन केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं थे। बेतिया में मजलिस-ए-अज़ा, इमाम हुसैन (अ.) की अज़ादारी तथा धार्मिक आयोजनों के संरक्षण और विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बीमारी के अंतिम दिनों में भी वह लखनऊ से ऑनलाइन मजलिस सुनते थे और आयोजकों से लगातार संपर्क बनाए रखते थे।

वह अपनी सादगी, मिलनसार स्वभाव, अतिथि सत्कार, मानव सेवा और जरूरतमंदों की मदद के लिए पूरे शहर में सम्मानित थे। सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

शहर ने खोया एक समर्पित व्यक्तित्व

इमामबाड़ा बेतिया के मुतवल्ली सैयद शब्बीर हुसैन ने कहा कि सैयद दिलदार हुसैन के निधन से बेतिया ने एक ऐसी निस्वार्थ और समर्पित शख्सियत को खो दिया है, जिसने अपना पूरा जीवन जनसेवा, अज़ादारी और सामाजिक एकता के लिए समर्पित कर दिया।

वहीं, प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना हुसैन हैदर ने अपने शोक संदेश में कहा कि "सैयद दिलदार हुसैन एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने आप में एक संस्था थे। उनकी चिकित्सा सेवाएं, उत्कृष्ट व्यवहार और जनसेवा हमेशा याद रखी जाएंगी। उनका निधन पूरे चंपारण के लिए अपूरणीय क्षति है।"

नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

शुक्रवार को बेतिया में उनकी नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की गई, जिसमें उलेमा, डॉक्टर, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी तथा विभिन्न समुदायों के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। इसके बाद उन्हें बड़ी ईदगाह कब्रिस्तान, बेतिया में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

सैयद दिलदार हुसैन अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र इंजीनियर दिलशाद हुसैन और डॉ. दिल नवाज़ हुसैन सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

बेतिया टाइम्स परिवार दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है तथा ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उन्हें शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल दें।

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