पश्चिम चम्पारण के बेतिया स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर की मानवीय पहल से नौ वर्षों से बिछड़ा एक परिवार आखिरकार फिर से एक हो गया। वर्ष 2017 से लापता सुषमा की पहचान कर्नाटक में होने के बाद प्रशासनिक समन्वय और कानूनी प्रक्रिया के जरिए उन्हें सुरक्षित उनके पति मनोज गिरी और परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। वर्षों बाद हुए इस भावुक मिलन ने सभी की आंखें नम कर दीं।
मुख्य बिंदु:
- सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल से 9 वर्षों बाद परिवार का पुनर्मिलन
- कर्नाटक के वन स्टॉप सेंटर से मिली सूचना के बाद हुई पहचान
- वीडियो कॉल के दौरान पति मनोज गिरी ने पत्नी की पहचान की पुष्टि की
- कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर सुषमा को सुरक्षित घर लाया गया
- कर्नाटक में रह रहीं दो बेटियों को भी परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू
बेतिया। पश्चिम चम्पारण के सखी वन स्टॉप सेंटर की संवेदनशील पहल ने नौ वर्षों से बिछड़े एक परिवार को फिर से एक कर दिया। वर्ष 2017 से लापता सुषमा का अपने पति मनोज गिरी और परिवार से भावुक पुनर्मिलन हुआ। वर्षों बाद एक-दूसरे को सामने देखकर पति-पत्नी की आंखें छलक उठीं, जबकि परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
शुक्रवार को सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया में वरीय उप समाहर्ता-सह-नोडल पदाधिकारी रोचना माद्री की उपस्थिति में सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर सुषमा को उनके पति मनोज गिरी के सुपुर्द कर दिया गया।
केन्द्र प्रशासक रश्मि कुमारी ने बताया कि कर्नाटक के वन स्टॉप सेंटर से सूचना मिली थी कि वहां सुषमा नाम की एक महिला रह रही है, जो केवल अपने पति और गांव का नाम बता पा रही थी। सूचना मिलते ही सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया की टीम ने गोपालपुर थाना के सहयोग से जांच शुरू की। सत्यापन में महिला की पहचान ग्राम विशम्भरा, थाना गोपालपुर निवासी सुषमा के रूप में हुई।
इसके बाद फरवरी 2026 में सुषमा के पति मनोज गिरी की कर्नाटक स्थित सेंटर से वीडियो कॉल कराई गई। स्क्रीन पर पत्नी को देखते ही मनोज गिरी भावुक हो गए और उनकी पहचान की पुष्टि करते हुए पत्नी को सुरक्षित घर लाने की अपील की।
मनोज गिरी ने बताया कि 28 फरवरी 2005 को उनका विवाह सुषमा से हुआ था। वर्ष 2017 में उनकी पत्नी एक बच्चे को लेकर अचानक घर से चली गई थीं। उस समय परिवार में चार बच्चे थे और सुषमा गर्भवती भी थीं। काफी तलाश के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल सका। समय के साथ परिवार को लगा कि शायद वह अब जीवित नहीं हैं। ऐसे में सखी वन स्टॉप सेंटर से पत्नी के सुरक्षित मिलने की सूचना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी।
पहचान की पुष्टि होने के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया ने कर्नाटक के उडुपी स्थित स्टेट होम फॉर वूमन से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद सुषमा को प्रशासनिक अभिरक्षा में सुरक्षित पश्चिम चम्पारण लाया गया।
वरीय उप समाहर्ता रोचना माद्री ने कहा कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल संकटग्रस्त महिलाओं को आश्रय ही नहीं देता, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और उनके परिवार व समाज से पुनः जोड़ने का भी कार्य करता है। उन्होंने कहा कि यह मामला प्रशासनिक समन्वय, मानवीय संवेदनशीलता और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।
रश्मि कुमारी ने बताया कि मनोज गिरी की दो बेटियां फिलहाल कर्नाटक की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की देखरेख में हैं। उन्हें भी जल्द पश्चिम चम्पारण लाकर परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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