बेतिया । पश्चिम चंपारण जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बने राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) बेतिया में इलाज की व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है।
सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आपात स्थिति के बावजूद अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की अनुपस्थिति आम बात हो गई है, जिससे मरीजों की जान पर खतरा मंडराता रहता है।
परिजनों का कहना है कि आज भी जीएमसीएच की स्थिति पुराने एमजेके अस्पताल बेतिया से बदतर हो गई है, जहां पहले नियमित रूप से सीनियर डॉक्टर स्वयं मरीजों का इलाज करते थे।
वर्तमान व्यवस्था में अक्सर इंटर्नशिप कर रहे छात्रों के भरोसे ऑपरेशन और गंभीर इलाज किया जा रहा है, जिससे परिजनों में रोष बढ़ता जा रहा है। कई बार इलाज को लेकर मरीजों के परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच झड़प की स्थिति भी बन जाती है।
जानकारी के अनुसार, 24जून (बुधवार) को एनएच-727 पर टेंपो और पिकअप वाहन के बीच हुई भीषण टक्कर में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को इलाज के लिए जीएमसीएच बेतिया में भर्ती कराया गया, लेकिन आरोप है कि गंभीर हालत के बावजूद कोई भी वरिष्ठ चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं था।
नया टोला निवासी एवं समाजसेवी तनजीर आलम ने बताया कि उन्होंने अस्पताल अधीक्षक, उपाधीक्षक और सिविल सर्जन को बार-बार फोन कर तत्काल डॉक्टर उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन डॉक्टरों की ड्यूटी निर्धारित थी, वे अस्पताल से अनुपस्थित थे और मौजूद जूनियर डॉक्टर भी मरीजों की गंभीर स्थिति को लेकर उदासीन नजर आए।
जब अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कोई समाधान नहीं निकला तो मरीजों के परिजन मजबूरन बेतिया के सांसद डॉ. संजय जायसवाल के आवास पहुंचे। सांसद घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन फोन पर पूरी जानकारी दिए जाने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए बेहतर इलाज का आश्वासन दिया।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल जीएमसीएच बेतिया बल्कि राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Tell Your Opinion here!