बेतिया के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) में प्रसूता की मौत के बाद समाचार संकलन के लिए पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, बंधक बनाए जाने और सामान छीने जाने के मामले ने जिले में गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के विरोध में पत्रकारों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले को लेकर पत्रकारों में भारी आक्रोश है और उन्होंने समयबद्ध कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
मुख्य बातें:
- जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच व कार्रवाई की मांग
- GMCH में पत्रकारों के साथ कथित मारपीट व सामान छीने जाने पर आक्रोश।
- पत्रकारों ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की।
- आरोपित अधिकारियों को जांच तक हटाने की मांग उठी।
- मोबाइल व नगदी छीनने का आरोप
- कार्रवाई नहीं होने पर पत्रकारों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
बेतिया | राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH Bettiah) में एक प्रसूता की मौत के बाद समाचार संकलन के लिए पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित रूप से हुई मारपीट, बंधक बनाए जाने और सामान छीने जाने की घटना ने जिले में सनसनी फैला दी है। इस मामले को लेकर पत्रकारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
प्रसूता की मौत से जुड़ी है पूरी बात
जानकारी के अनुसार, 17 जून को प्रसूता आरती देवी की मौत के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसी दौरान घटना की जानकारी जुटाने पहुंचे पत्रकारों पर इंटर्न चिकित्सकों द्वारा हमला किए जाने का आरोप लगाया गया है। पत्रकारों का कहना है कि उन्हें जबरन रोका गया, उनके साथ मारपीट की गई तथा मोबाइल फोन, नकद राशि और अन्य सामान छीन लिए गए।
पत्रकारों का यह भी आरोप है कि यह पूरी घटना अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. दिवाकांत मिश्रा, डॉ. राजेश कुमार एवं नगर थानाध्यक्ष की मौजूदगी में हुई, लेकिन स्थिति को नियंत्रित करने के बजाय कथित तौर पर इंटर्न चिकित्सकों को उकसाया गया। वहीं, नगर थानाध्यक्ष की भूमिका को भी संदिग्ध बताते हुए पत्रकारों ने सुरक्षा में घोर लापरवाही का आरोप लगाया है।
पत्रकारों की मांगे
घटना के विरोध में पत्रकारों के एक शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस प्रकार का हमला न केवल पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए भी गंभीर खतरा है।
पत्रकारों की प्रमुख मांगें
- पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच के लिए विशेष जांच समिति का गठन
- छीने गए मोबाइल फोन, नकद राशि व अन्य सामान की अविलंब बरामदगी
- जांच पूरी होने तक आरोपित अधिकारियों को जीएमसीएच से हटाने की कार्रवाई
- नगर थानाध्यक्ष के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई
- पत्रकारों की सुरक्षा की ठोस गारंटी
- जीएमसीएच में इंटर्न चिकित्सकों द्वारा कथित गुंडागर्दी और दुर्व्यवहार पर सख्त रोक
कार्यवाही न होने पर शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी
पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जिले भर के पत्रकार लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
इस दौरान पत्रकारों के शिष्टमंडल में सुधीर कुमार, सुनील आनंद, कृष्णकांत मिश्र, गणेश वर्मा, एम. शकील, श्रीनिवास गौतम, रमेंद्र गौतम, सुमित कुमार, छोटेलाल भगत, कैलाश कुमार, जितेंद्र कुमार, मुन्ना राज, अजय कुमार शर्मा सहित अन्य पत्रकार शामिल रहे।

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