बेतिया में आयोजित एक कार्यक्रम में शिक्षा के साथ तकनीकी ज्ञान की अहमियत पर जोर दिया गया। संस्था के प्राचार्य मौलाना नूर अहमद और उपाध्यक्ष डॉ. आफताब अहमद ने बताया कि तकनीकी शिक्षा छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है और संस्था में कई नए कोर्स शुरू किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
- तकनीकी शिक्षा से छात्र अपने पैरों पर खड़े होकर रोज़गार पा सकते हैं।
- संस्था में पहले भी सिलाई, बुनाई, इलेक्ट्रिशियन जैसे कोर्स चलाए जाते थे।
- अब कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रिशियन और ट्रांसलेशन के कोर्स शुरू हुए हैं।
- कुल 120 सीटों में से 90 छात्रों ने अभी तक नामांकन लिया है।
- टॉप 3 छात्रों को आगे की उच्च शिक्षा के लिए विशेष सहायता दी जाएगी।
बेतिया | शिक्षा ग्रहण के साथ साथ तकनीकी शिक्षा का ज्ञान होने से छात्र छात्राए जीवन मे अपने पैरो पर खड़ा हो सकते है। पूर्व मे भी इस संस्था से बहुत से बच्चो ने तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर अपने परिवार का भरण पोषण करते है।
उक्त बातें प्राचार्य मौलाना नूर अहमद ने कही, वे शनिवार को विभिन्न टेक्निकल कोर्स मे नामांकन लिए छात्र छात्राओं को सम्बोधित करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा की लगभग चालिस वर्ष पूर्व तक यहां सिलाई, बुनाई, जूता, टेक्नीशियन, कपड़ा बुनाई आदि का कोर्स कराया जाता था।तकनीकी कारणों से बंद हो गया था।
उपाध्यक्ष डॉक्टर आफताब अहमद ने बताया की कमिटी के प्रयासों के बाद डॉक्टर मौलाना मझहरुल हक व बिहार सरकार के द्वारा इस संस्था को 16 कंप्यूटर, दो डिजिटल बोर्ड तथा इलेक्ट्रीशियन व मोबाईल रिपेयर्स के सामान मुहैया कराया गया है।
उन्होंने बताया की इस संस्था मे अरबी इंग्लिश ट्रांसलेशन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रीशियन व मोबाईल रिपेर्स का कोर्स शुरु किया गया है।
इन चार विभागों मे कुल 120 सीट निर्धारित है, जिनमे अबतक 90 छात्र छात्राओं ने नामांकन लिया है। संस्था के सचिव इबरार अहमद ने बताया की छात्र छात्राओं के लिए ऑडियो व वीडियो क्लासेस की भी व्यस्था की गई है। अरबी-इंग्लिश ट्रांसलेशन का कोर्स एक साल की है जबकि बाकी तीन विभागों के कोर्स छः माह का है।
उन्होंने कहा की इस संस्था से जो भी बच्चे बच्चियां टॉप तीन मे आएंगे उनके लिए आगे की उच्च शिक्षा की व्यवस्था अपने स्तर से करेंगे।मौके पर एस ए शकील, शौकत अली, मो. बहरुद्दीन व अन्य लोग उपस्थित थे।

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