पश्चिम चंपारण के बेतिया शहर का हृदय स्थल माना जाने वाला बड़ा रमना मैदान आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। कभी शाही आयोजन, खेलकूद और सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र रहा यह ऐतिहासिक मैदान अब प्रशासनिक फैसलों के कारण धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों ने इस धरोहर को बचाने के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी है।
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| ज्ञापन सौंपते खेल प्रेमी |
इतिहास और गौरव का प्रतीक रहा बड़ा रमना
बड़ा रमना मैदान चंपारण के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति का जीवंत साक्षी रहा है। कहा जाता है कि यह मैदान पहले पोलो ग्राउंड था और इसकी घास इंग्लैंड से मंगवाई गई थी, जिसकी खासियत है कि यह हर मौसम में एक समान रहती है।
करीब 52 बीघा में फैले इस मैदान का उपयोग बेतिया राज के समय शाही आयोजन, घुड़सवारी और सैन्य परेड के लिए किया जाता था। दशकों से यहां दशहरा मेला, रामलीला, रावण वध और रामनवमी जैसे बड़े आयोजन होते रहे हैं।
खेल और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र
- यह मैदान बेतिया के लोगों के लिए सिर्फ एक खुला मैदान नहीं, बल्कि जीवन का अहम हिस्सा रहा है।
- यहां रोज सुबह लोग मॉर्निंग वॉक, योग और व्यायाम करते हैं
- मेडिकल कॉलेज के मरीज स्वास्थ्य लाभ के लिए यहां आते हैं
- युवा पुलिस और सेना की तैयारी करते हैं
- कई स्कूलों के बच्चे यहीं खेलते हैं
- फुटबॉल, क्रिकेट, कबड्डी, वॉलीबॉल और एथलेटिक्स की नियमित ट्रेनिंग होती है
- यह मैदान जिला और राज्य स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
प्रशासनिक फैसलों से घटता जा रहा क्षेत्रफल
समय के साथ विभिन्न निर्माण कार्यों के कारण बड़ा रमना का क्षेत्र लगातार कम होता जा रहा है:
- ऑडिटोरियम निर्माण से बड़ा हिस्सा खत्म हुआ
- पश्चिम दिशा में सड़क चौड़ीकरण से जमीन कम हुई
- हाईटेक स्टेडियम के नाम पर आधा मैदान अधिग्रहित किया जा रहा है
इसके अलावा मैदान के बीचों-बीच गड्ढा खोदकर बाउंड्री बनाने की तैयारी चल रही है, जिससे मैदान का स्वरूप पूरी तरह बदलने का खतरा है।
वर्तमान स्थिति: प्रवेश भी हुआ मुश्किल
- वर्तमान में बड़ा रमना की स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है।
- मैदान में सामान्य प्रवेश लगभग बंद हो चुका है
- केवल मठ और अनाथालय के पास टूटी जगह से ही प्रवेश संभव है
- मैदान कई हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है
स्थानीय लोगों की मांग
खेल प्रेमियों और बेतिया वासियों का कहना है कि वे आधुनिक स्टेडियम के निर्माण का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन इसे किसी अन्य स्थान पर बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया है कि स्टेडियम को हजारी, जीरात, ढोल, हवाई अड्डा क्षेत्र, जैसे स्थानों पर शिफ्ट किया जा सकता है। बड़ा रमना बचाओ आंदोलन की अपील
स्थानीय लोगों ने “बड़ा रमना मैदान बचाओ आंदोलन” के तहत सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए आगे आएं।
उनका कहना है कि अगर अभी कदम नहीं उठाया गया, तो बेतिया अपनी एक महत्वपूर्ण पहचान हमेशा के लिए खो देगा।

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