बेतिया नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 15 की एक वृद्ध महिला सरकारी लापरवाही का ऐसा शिकार हुई हैं कि उन्हें अब स्वयं को “ज़िन्दा” साबित करने के लिए दफ़्तर-दफ़्तर भटकना पड़ रहा है। सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है, जबकि वे पूर्णतः जीवित हैं और हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग भी कर चुकी हैं। वृद्धा पेंशन कई महीनों से बंद होने पर जब उन्होंने जांच करवाई, तब यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जांच पदाधिकारी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
मुख्य बिंदु
- वार्ड 15, मोहल्ला किला निवासी सायरा खातून को रिकॉर्ड में गलती से मृत दर्शा दिया गया।
- सितंबर माह से उनका वृद्धा पेंशन बंद हो गया, जिसके बाद उन्होंने इसकी जांच कराई।
- ई-लाभार्थी रिपोर्ट में हटाने का कारण स्पष्ट रूप से लिखा—“जांच के समय लाभार्थी मृत पाया गया।”
- महिला अगस्त माह तक नियमित पेंशन प्राप्त कर चुकी थीं और विधानसभा चुनाव में मतदान भी किया है।
- पेंशन बहाली के लिए अब उन्हें पहले अपनी जीवितता प्रमाणित करनी होगी, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया पुनः शुरू होगी।
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| महिला की तस्वीर |
बेतिया। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 15 की एक वृद्ध महिला को पता ही नहीं कि वह कब मर चुकी है। जबकि उसने विधानसभा चुनाव में अपने मत का प्रयोग भी किया है।
सूत्रों के अनुसार वार्ड नंबर 15, मो. किला, बेतिया निवासी सायरा खातून पति स्व श्री सैनुल्लाह मियां जब सितंबर माह की अपना वृद्धा पेंशन उसके खाते में नहीं आया तो वह बेतिया प्रखंड कार्यालय में तहकीकात करने पहुंची, बाहर किसी कैफे से अपने बारे में e-लाभार्थी की भुगतान स्थिति की जांच करें का डिटेल प्रिंट निकलवाया तो उसके अंतिम कालम हटाने का कारण में यह स्पष्ट किया गया है कि जांच के समय लाभार्थी का मृत पाया जाना अर्थात लाभार्थी को जांच पदाधिकारी ने मृत घोषित कर दिया जिस कारण उनके नाम पेंशन की अगली किस्त सितंबर से अब तक नहीं मिल सकती है, क्योंकि वह मर चुकी है , जबकि वह अपना वृद्धा पेंशन अगस्त 25 माह तक उठाती है।
अब वह अपने को जिंदा साबित करने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है जब वह जिंदा हो जाएगी तब फिर से पेंशन में कागजात की प्रक्रिया शुरू होगा और उसका पेंशन शायद बहाल हो जाए।

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