नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दो नर्सिंग होम सील, मरीजों की शिफ्टिंग को लेकर हंगामा

बेतिया। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को शहर के राजगुरु चौक स्थित नारायण हॉस्पिटल और संजीवनी हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वहां संचालित लैब, अल्ट्रासाउंड सेंटर और क्लिनिक को सील कर दिया। प्रशासन के मुताबिक, दोनों संस्थानों को करीब एक माह पूर्व आवश्यक कागजात और मानकों से संबंधित कमियों को लेकर नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित अवधि में कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं करने और स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। इसके लिए मौके पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बेतिया नगर और कालीबाग थाना की पुलिस टीम तैनात रही।

मरीजों को शिफ्ट करने पर हुआ विरोध

प्रशासन की ओर से मरीजों को इलाज के लिए बेतिया स्थित जीएमसीएच भेजने की तैयारी की गई, लेकिन कई मरीजों और उनके परिजनों ने इसका विरोध कर दिया। मरीजों का कहना था कि उन्होंने इलाज के लिए अस्पताल में फीस जमा की है और उनका इलाज चल रहा है। ऐसे में उन्हें अचानक दूसरे अस्पताल में क्यों भेजा जा रहा है।

कुछ मरीजों ने ऑपरेशन के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए सीढ़ियों के रास्ते अस्पताल से बाहर निकालने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई मरीजों का ऑपरेशन हुआ है और उन्हें कई मंजिल से सीढ़ियों के रास्ते नीचे लाना जोखिम भरा हो सकता है। सीढ़ी उतरने के दौरान टांका खुलने या किसी अन्य चिकित्सकीय परेशानी की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

मरीजों ने जमा फीस वापस किए जाने तक अस्पताल खाली करने से इनकार किया। विरोध के चलते मौके पर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बनी रही। प्रशासनिक अधिकारियों ने मरीजों और उनके परिजनों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

जांच में कागजात और सुरक्षा मानकों में कमियां मिलने का दावा

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूर्व में की गई जांच के दौरान दोनों संस्थानों में कई स्तर पर अनियमितताएं सामने आई थीं। अस्पताल के पंजीकरण और नवीनीकरण से संबंधित दस्तावेज, बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण से जुड़े कागजात तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों में कमियां पाई गई थीं।

इसके अलावा फायर सेफ्टी ऑडिट और इलेक्ट्रिक लोड सर्टिफिकेट से संबंधित दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए। अधिकारियों ने अस्पताल में प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों और आवश्यक चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता की भी जांच की।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पूर्व में नोटिस देकर कमियों को दूर करने और आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने का अवसर दिया गया था। निर्धारित समय में अपेक्षित अनुपालन नहीं होने के बाद कार्रवाई की गई।

मरीजों का डाटा नहीं देने का भी आरोप

कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम ने अस्पताल प्रबंधन से भर्ती मरीजों की संख्या, उनकी बीमारी और वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति से संबंधित विवरण मांगा। अधिकारियों के अनुसार, मरीजों को सुरक्षित तरीके से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए यह जानकारी जरूरी थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से अपेक्षित डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया।

बेतिया प्रखंड विकास पदाधिकारी सह दंडाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि प्रशासनिक टीम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ कार्रवाई में सहयोग कर रही है। मरीजों को सुरक्षित तरीके से दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान नर्सिंग होम की विभिन्न व्यवस्थाओं और संचालित सेवाओं की जांच की गई।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डॉ. शहाबुद्दीन के नेतृत्व में जांच और कार्रवाई की।

अस्पताल प्रबंधन ने कार्रवाई को बताया एकतरफा

इधर, अस्पताल प्रबंधक बीरेन्द्र प्रसाद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कम शुल्क पर मरीजों का इलाज किया जाता है और कम खर्च में विभिन्न चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य निजी अस्पतालों की तुलना में उनके संस्थान को ही निशाना बनाया जा रहा है।

अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि नारायण हॉस्पिटल और संजीवनी हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. डीपी सिंह को कार्रवाई से संबंधित कोई स्पष्ट सूचना अथवा नोटिस सिविल सर्जन कार्यालय से नहीं मिला है। प्रबंधक ने कहा कि कार्रवाई को लेकर वे कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेंगे।

पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए नगर थाना और कालीबाग थाना की पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही। अस्पताल परिसर के आसपास भी पुलिस बल तैनात रहा।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद शहर में संचालित अन्य निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों के संचालकों में भी हड़कंप की स्थिति है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, नियमों और मानकों का पालन नहीं करने वाले अन्य संस्थानों की भी जांच और कार्रवाई की जा सकती है।

अन्य निजी अस्पतालों की जांच की भी मांग

इस कार्रवाई के बाद शहर में संचालित अन्य निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि निजी अस्पतालों के पंजीकरण, सुरक्षा मानकों और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जांच की जा रही है तो शहर के अन्य अस्पतालों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

निजी अस्पतालों में वैध पंजीकरण और लाइसेंस, प्रशिक्षित चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ, 24 घंटे आपातकालीन सेवा, फायर सेफ्टी व्यवस्था, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था एवं पावर बैकअप, ऑक्सीजन की उपलब्धता, ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल कचरे का उचित निस्तारण, स्वच्छता और पारदर्शी बिलिंग जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं का होना महत्वपूर्ण है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की जांच की संभावना जताई गई है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में जांच के दायरे में शहर के और कितने निजी चिकित्सा संस्थान आते हैं।

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