गरीबों व आम आवाम के लिये वोट का अधिकार ही उनके वजूद का आधार है। बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा रचित संविधान में यदि देश के गरीबों और आम आवाम को वोट का अधिकार नहीं मिला होता तो आज समाज में गरीबों को कोई पूछने वाला भी नहीं होता।
स्थानीय दबंग, सामन्ती, साम्प्रदायिक, अपराधी ताकतों, कॉर्पोरेट लुटेरों और उनकी सरकारों का मनमाना राज पाट चलता। गरीबों और आम आदमी के लिए जो थोड़ी बहुत सरकार को काम करने कि मजबूरी होती है वह भी नहीं होती।
देश कि आजादी के समय संविधान निर्माण के समय में आर आर एस के नेता अपने लाख कोशिश के बावजूद गरीबों और आम आवाम के वोट के अधिकार को संविधान में दर्ज कराने से रोक नहीं पाये। आज वो काम गरीबों और आम आवाम को वोट के अधिकार से वंचित करने का काम,प्रधानमंत्री मोदी कर रहे है। इसके लिए मोदी सरकार ने वोट चोर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नियुक्त किया है। इसके लिए चुनाव आयोग का गठन करने वाली कमिटी में से मुख्य न्यायाधीश को निकाल कर अमित शाह को शामिल करने के लिये कानून बना दिया है।
वोट चोर चुनाव आयुक्त को बचाने का कानून भी बना दिया है । और अब चोरी पकड़े जाने पर भाजपा कि मोदी सरकार उसे बचाने के लिए देश में दमन चला रही है। उक्त वक्तव्य इण्डिया गठबंधन के आह्वान पर भाकपा माले द्वारा निकाले गये लोकतंत्र बचाओ मार्च में माले नेता व पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता अपने सम्बोधन में दें रहे थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ़्तारी के लिए आगे आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।
मार्च को सम्बोधित करते हुये भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य और इंकलाबी नौजवान सभा के नेता फरहान राजा ने कहा की आज देश में एस आई आर के जरिये 13 करोड़ 20 लाख लोगों का नाम मतदाता सूची से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कटवा दिया है। जो सही नाम है। बिना संसद में पास कराये फॉर्म 6 में बदलाव कर दिया है। जो गैर संवैधानिक है।
इआरओ, डीएम जैसे निर्वाचन पदाधिकारियों के मतदाता का नाम जोड़ने जैसे अधिकारों को गैर कानूनी तरीके से निलंबित कर दिया है, उसकी चोरी पकड़ी गई है। उसे निश्चित ही सजा मिलनी चाहिए। लेकिन वोट बचाने लोकतंत्र बचाने के लिए जंतर मंतर दिल्ली और पुरे देश में चल रहे आंदोलन पर मोदी सरकार दमन कर रही है। आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा और महिला कार्यकर्त्ताओ तक से बर्बर तरीके से मोदी सरकार की दिल्ली पुलिस पेश आ रही है.आगे उन्होंने कहा की किसी दमन से भारत के लोक तंत्र को ख़तम नहीं किया जा सकता। गरीबों को और आम आवाम को वोट अधिकार से कोई नहीं वंचित कर सकता। एस आई आर को रद्द करना होगा। ज्ञानेश व वोट चोरों की सरकार को जाना होगा।
माले नेता सुनील कुमार राव ने SIR के बाद हुये बिहार और अन्य चुनावों को रद्द करने, चुनाव आयोग का गठन करने वाली कमिटी में मुख्य न्याय धीश को जोड़ने, वोट चोर मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने के लिये 2023 में बने कानून को रद्द करने की मांगो को उठाते हुये आंदोलन तेज करने का आहवान किया।
लोक संघर्ष समिति के प्रदेश नेता पंकज जी ने कहा बिना चुनाव और वोटर के लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती। जिसे मोदी सरकार ख़त्म कर रही है। चुनाव चोरी कर कई प्रदेशो में भाजपा ने अपनी सरकार बना लिया है जो लोकतंत्र के लिये घातक है।
वोट बचाओ लोकतंत्र बचाओ मार्च का नेतृत्व माले नेता संजय यादव, सुरेन्द्र चौधरी, जवाहर प्रसाद, संजय राम, अब्दुल खैर, संजय मुखिया, अच्छेलाल राम, सीताराम राम, इस्लाम अंसारी, कलाम अंसारी, मुन्ना सैफी, नवीन मुखिया,वीरेंद्र पासवान, नजरें आलम, केदार राम, नन्द किशोर महतो, मनोज बैठा, भरत शर्मा लालजी यादव, अशरफी राम, महेन्द्र राम, विनोद यादव और अन्य नेताओ ने किया।

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