सड़कें बनीं नदियां, आवागमन बाधित; ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की लगाई गुहार
योगापट्टी प्रखंड क्षेत्र के दियारा इलाके में लगातार हो रही बारिश और वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े जा रहे पानी के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। प्रखंड क्षेत्र की सिसवा मंगलपुर, जरलपुर खुटवानिया, डुमरी और बलुआ भवानीपुर पंचायतों के कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इससे ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और कई इलाकों का प्रखंड मुख्यालय तथा अन्य क्षेत्रों से संपर्क प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ का पानी मुख्य सड़कों पर जमा होने के कारण सड़कें नदियों में तब्दील हो चुकी हैं। लोगों को जरूरी काम के लिए भी घरों से निकलने में काफी परेशानी हो रही है। सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिनके घरों में पानी घुस गया है और वे अपने परिवार के साथ छतों पर रहने को मजबूर हैं।
15 दिनों से घरों में कमर भर पानी
जरलपुर खुटवानिया पंचायत के वार्ड संख्या 14 स्थित गजना गांव निवासी गयासुद्दीन अंसारी और भघेलू घटवार ने बताया कि उनके गांव में करीब 15 दिनों से बाढ़ का पानी जमा है। कई घरों में कमर तक पानी भर गया है। ग्रामीणों को मजबूर होकर घरों की छतों पर रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव से बाहर निकलने वाली मुख्य सड़कें भी पानी में डूबी हुई हैं। ऐसे में आवागमन पूरी तरह बाधित है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की इस विकट स्थिति में प्रशासन की ओर से अब तक पर्याप्त सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है।
नाव तक उपलब्ध नहीं कराने का आरोप
गांव से नाव के माध्यम से पहुंचे मुस्लिम मियां, अली हुसैन अंसारी, महफूज आलम, आकलख अहमद और गोपाल चौधरी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त ग्रामीणों की सहायता के लिए प्रशासन की ओर से अब तक नाव तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का समुचित जायजा नहीं लिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि एक दिन एक हल्का कर्मचारी गांव पहुंचे थे, लेकिन वे मुखिया के दरवाजे से ही वापस लौट गए।
रात में बिजली बंद होने से सांप-बिच्छू का खतरा
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। ग्रामीणों के अनुसार, दिन में बिजली आपूर्ति जारी रहती है, लेकिन रात के समय बिजली बंद कर दी जाती है। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में अंधेरा होने के बाद सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ग्रामीण रात के समय भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं।
निजी नाव से ग्रामीणों की मदद कर रहे भघेलू घटवार
बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच ग्रामीण भघेलू घटवार अपने निजी नाव से लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में आवागमन का कोई दूसरा साधन नहीं होने के कारण वे अपनी नाव से ग्रामीणों की मदद कर रहे हैं।
मुखिया ने माना- प्रशासन से नहीं मिली सुविधा
इस संबंध में जरलपुर खुटवानिया पंचायत के मुखिया से प्रतिक्रिया ली गई। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को सही बताते हुए कहा कि अब तक प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मुखिया ने बताया कि नाव के संबंध में अंचल अधिकारी बिक्रम सिंह की ओर से उन्हें अपनी नाव से ग्रामीणों की सहायता करने को कहा गया है। इसके लिए होने वाले कार्य शुल्क का भुगतान सरकार की ओर से किए जाने की बात कही गई है।
उन्होंने बताया कि पंचायत की ओर से बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के बीच चिउड़ा और मीठा भी वितरित किया जा रहा है।
वहीं, बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं और प्रशासन की ओर से की जा रही व्यवस्था के संबंध में जानकारी लेने के लिए अंचल अधिकारी के कार्यालय नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका।
ग्रामीणों ने लगाई राहत और नाव उपलब्ध कराने की गुहार
बाढ़ से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल नाव उपलब्ध कराने, राहत सामग्री का वितरण करने, बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा बाढ़ प्रभावित इलाकों में अधिकारियों की टीम भेजकर स्थिति का जायजा लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द राहत और आवागमन की व्यवस्था नहीं की गई तो उनकी परेशानी और बढ़ सकती है।

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