प्रसूता व नवजात की मौत के बाद निजी नर्सिंग होम में हंगामा,

प्रसूता व नवजात की मौत के बाद निजी नर्सिंग होम में हंगामा, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

बेतिया। शहर के जीएमसीएच अस्पताल से लगभग 100 मीटर पीछे स्थित एक निजी नर्सिंग होम में सोमवार देर रात प्रसव के दौरान प्रसूता और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, स्थिति को नियंत्रित किया और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जीएमसीएच भेज दिया। स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतका की पहचान शिकारपुर थाना क्षेत्र के नंदपुर वार्ड संख्या-4 निवासी प्रतिमा देवी, पत्नी अखिलेश सहनी, के रूप में हुई है। मृतका के पति अखिलेश सहनी ने बताया कि प्रसव पीड़ा शुरू होने पर वे अपनी पत्नी को इलाज के लिए सवेरा नर्सिंग होम लेकर पहुंचे थे। वहां चिकित्सक द्वारा लिखी गई जांच, अल्ट्रासाउंड एवं अन्य आवश्यक परीक्षण कराए गए, जिनकी रिपोर्ट सामान्य बताई गई। इसके बावजूद इलाज के दौरान पहले गर्भस्थ शिशु और बाद में उनकी पत्नी की मौत हो गई।

परिजनों का आरोप है कि दोनों की मौत के बाद नर्सिंग होम के चिकित्सक और कुछ कर्मचारी वहां से चले गए, जिससे आक्रोशित लोगों ने अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और काफी समझाइश के बाद स्थिति को शांत कराया।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम भी नर्सिंग होम पहुंची और प्रारंभिक जांच की। जांच टीम में शामिल डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है तथा सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। इलाज से संबंधित प्रिस्क्रिप्शन पर डॉ. अविनाश सिंह का नाम अंकित होने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे पिछले लगभग दो वर्षों से उक्त नर्सिंग होम में सेवाएं नहीं दे रहे हैं। उनका आरोप है कि क्लीनिक संचालक उनकी जानकारी के बिना उनके नाम का उपयोग कर रहा है। इस दावे की भी जांच की जा रही है।

सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल अभिलेखों और जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी प्रकार की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही प्रसूता और गर्भस्थ शिशु की मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।

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