बेतिया में निजी अस्पताल की नर्स की संदिग्ध मौत से सनसनी, तीसरी मंजिल के कमरे से मिला शव; परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप
बेतिया में निजी अस्पताल की नर्स की संदिग्ध मौत से सनसनी, तीसरी मंजिल के कमरे से मिला शव; परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप
बेतिया। पश्चिम चंपारण मुख्यालय बेतिया स्थित हॉस्पिटल रोड के गंगा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल एवं ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत एक महिला कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से पूरे शहर में सनसनी फैल गई। अस्पताल की तीसरी मंजिल के एक कमरे से उसका शव बरामद होने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और कुछ कर्मचारियों पर हत्या कर शव छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, सदर एसडीपीओ अजीत कुमार तथा एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम मौके पर पहुंची और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
मृतका की पहचान सेखौना मठ निवासी ममता कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार वह पिछले लगभग छह वर्षों से गंगा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में डॉ. संतोष कुमार सिंह और डॉ. रूबी के अधीन स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत थीं।
मृतका की बहन रीता देवी ने बताया कि घटना से दो दिन पहले अस्पताल में वेतन भुगतान, कर्मचारियों के बीच विवाद और कथित गाली-गलौज को लेकर तनाव हुआ था। ममता ने फोन पर इसकी जानकारी परिवार को दी थी। घटना वाली रात भी उसकी परिवार से बातचीत हुई, लेकिन अगले दिन सुबह से उसका मोबाइल लगातार बंद मिलने लगा। कई बार संपर्क करने के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला तो परिजन अस्पताल पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों से पूछताछ करने पर किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और यह कहा गया कि ममता कहीं बाहर गई है। संदेह होने पर परिजनों ने स्वयं अस्पताल में तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान तीसरी मंजिल के एक कमरे में बेड के नीचे कोने में ममता का शव मिला। परिजनों का आरोप है कि शव को कई गद्दों से ढंककर रखा गया था, जिससे किसी को उसकी भनक न लगे।
शव मिलने के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर सबसे पहले डायल-112 की टीम पहुंची। इसके बाद नगर थाना पुलिस, सदर एसडीपीओ अजीत कुमार तथा एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। करीब तीन घंटे तक घटनास्थल की जांच चली। पुलिस ने अस्पताल परिसर से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए तथा सीसीटीवी फुटेज को भी अपने कब्जे में लेकर उसकी जांच शुरू कर दी है।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि ममता की गला दबाकर हत्या की गई और बाद में शव को छिपा दिया गया, ताकि रात के अंधेरे में उसे ठिकाने लगाया जा सके। उनका कहना है कि मृतका के गले पर दबाव के निशान दिखाई दे रहे थे। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
दूसरी ओर, अस्पताल संचालक डॉ. संतोष कुमार सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ममता कई वर्षों से अस्पताल में कार्यरत थीं और परिवार के सदस्य की तरह थीं। उनके अनुसार घटना की रात करीब 10 बजे तक वह मरीजों की देखभाल और दवा वितरण का कार्य कर रही थीं। सुबह अस्पताल में नहीं दिखने पर लगा कि वह घर चली गई होंगी। मोबाइल से संपर्क नहीं होने पर परिजनों से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया। बाद में परिजनों के साथ खोजबीन के दौरान तीसरी मंजिल पर उनका शव मिला। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी आवश्यक दस्तावेज जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को अस्पताल के बाहर रखकर आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस अधिकारियों ने काफी मशक्कत और समझाइश के बाद परिजनों एवं स्थानीय लोगों को शांत कराया, जिसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाया गया।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों की चौबीसों घंटे मौजूदगी रहती है, वहां एक कर्मचारी की मौत हो जाती है और किसी को इसकी जानकारी नहीं होती। वहीं दूसरी ओर, दूर से पहुंचे परिजन अस्पताल के भीतर खोजबीन कर शव तक पहुंच जाते हैं। इन परिस्थितियों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।
फिलहाल पुलिस हत्या, आत्महत्या तथा अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही ममता कुमारी की मौत के वास्तविक कारण और किसी की आपराधिक भूमिका पर स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

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