ट्रेन की चपेट में आने से घायल हुई फिशिंग कैट, ग्रामीणों ने समझा तेंदुए का शावक; वन विभाग ने किया रेस्क्यू

बगहा पश्चिम चंपारण में मानसून के दौरान बढ़े जलजमाव का असर अब वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जंगलों और निचले इलाकों में पानी भर जाने के कारण जंगली जानवर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में आबादी और रेलवे ट्रैक की ओर रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में बगहा-नरकटियागंज रेलखंड पर एक दुर्लभ वन्यजीव फिशिंग कैट घायल अवस्था में मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक तौर पर ग्रामीणों ने उसे तेंदुए का शावक समझ लिया था, लेकिन वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर उसकी पहचान फिशिंग कैट के रूप में की।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही वाल्मीकिनगर रोड-पनियहवा रेलखंड पर ट्रेन की चपेट में आने से एक भालू की मौत हुई थी। इसके अगले ही दिन एक अन्य वन्यजीव के घायल मिलने से वन विभाग और रेलवे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, नरकटियागंज-बगहा रेलखंड पर तिरुपति शुगर मिल के समीप मध्य मुख्य तिरहुत नहर स्थित रेलवे पुल संख्या-349 के पास ग्रामीणों ने रेलवे अधिकारियों को एक घायल वन्यजीव पड़े होने की सूचना दी। दूर से देखने पर उसका शरीर तेंदुए के शावक जैसा प्रतीत होने के कारण लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन ने वन विभाग को इसकी जानकारी दी।

सूचना पर बगहा वन क्षेत्र की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। निरीक्षण के बाद वनकर्मियों ने स्पष्ट किया कि वह तेंदुए का शावक नहीं, बल्कि एक वयस्क फिशिंग कैट (मछली पकड़ने वाली जंगली बिल्ली) है, जो संभवतः किसी ट्रेन की हल्की चपेट में आने से घायल हो गई थी।

बगहा रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक (एसएस) संतोष पांडेय ने बताया कि वन्यजीव के रेलवे ट्रैक के पास होने की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया गया। एहतियात के तौर पर उस क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों के चालकों को धीमी गति से ट्रेन चलाने तथा आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन रोकने के निर्देश दिए गए। बाद में वन विभाग द्वारा वन्यजीव को सुरक्षित हटाए जाने के बाद रेल परिचालन सामान्य कर दिया गया।

बगहा रेंजर श्रीमान मालकर ने बताया कि फिशिंग कैट की कमर में गंभीर चोट के निशान मिले हैं। प्रारंभिक अनुमान है कि वह किसी ट्रेन की हल्की चपेट में आ गई, जिससे वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गई। वन विभाग की टीम ने उसका सुरक्षित रेस्क्यू कर उपचार शुरू करा दिया है। चिकित्सकीय निगरानी में स्वस्थ होने के बाद उसे पुनः उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

वन अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं कोई जंगली जानवर घायल या भटका हुआ दिखाई दे तो उसे पकड़ने या परेशान करने की बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि मानसून के दौरान वन्यजीवों और रेलवे ट्रैक के बीच टकराव की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में वन विभाग और रेलवे प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय तथा संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की आवश्यकता है, ताकि वन्यजीवों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

टिप्पणियाँ